World Economic Slowdown: साल 2020 आ सकती है बड़ी विश्व आर्थिक मंदी

Economic Slowdown
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World Economic Slowdown:  ज्योतिष शास्त्र के अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि जब भी गोचर में शनि और गुरु आपने सामने आते हैं या शनि गुरु की युति किसी राशि में होती है तो वह अवधि प्राकृतिक आपदाओं/ युद्ध की स्थिति / विश्व आर्थिक मंदी के आमंत्रण का कारण बनती हैं, जिसका परिणाम मानव जाति को भारी विनास के रुप में पड़ता है। चीन के आर्थिक बाजार में भारी गिरावट का कारण इसका प्रभाव संपूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा ।

गुरु क्योंकि धन, आर्थिक स्थिति के कारक ग्रह है और शनि कष्ट, आपदाओं और काल के कारक ग्रह है। इस स्थिति में मकर राशि में दोनों का एक साथ होना प्राकृतिक आपदाओं के अतिरिक्त आर्थिक बाजार में रिकार्ड गिरावट का कारण बनेगा।

यह स्थिति विश्व आर्थिक मंदी की वजह बन सकती है. इस ग्रह युति की अवधि में इस प्रकार की आर्थिक आपदायें भयंकर रुप में आने के संकेत मिल रहे है। इस समय में विश्व भर में बड़े पैमाने पर वित्तीय संकट, आर्थिक गिरावट और सेंसेक्स के रिकार्ड स्तर से गिरने के प्रबल योग बना रहा है।

ऐसे में धन निवेश से बचना लाभकारी रहेगा. इससे पूर्व भी जब गुरु-शनि मकर राशि में 1842, 1901, 1961 में एक साथ आए थे तो कुछ इसी तरह की स्थिति देखने में आई थी.

युद्ध के बादल:

यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि 1961-1962 में जब गुरु-शनि एक साथ मकर राशि में एक साथ थे, तो पडौसी देश चीन से युद्ध हुआ था। मकर राशि भारत देश की कुंडली में नवम भाव की राशि है, और नवम भाव से गुरु-शनि तीसरे भाव को पीडित कर युद्ध की स्थिति एक बार फिर से बना सकते है।

2020 से 2022 के मध्य एक बार फिर से चीन और पाकिस्तान से सावधान रहना होगा. अन्यथा युद्ध के बादल सिर पर एक बार फिर मंडरा सकते हैं।

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गुरु के राशि परिवर्तन:

गुरु लगभग 12 वर्षों के बाद अपने घर धनु राशि में  5 नवंबर 2019 में आ गए थे। 5 नवम्बर 2019 से लेकर 23 जनवरी 2020 तक, गुरु और शनि युति धनु राशि में रहेंगे, गुरु के राशि परिवर्तन को ज्योतिष की दुनिया की बड़ी घटना माना जा रहा है।

शनिदेव 24 जनवरी 2020 को 30 वर्षों के बाद स्वराशि यानी स्वयं की राशि मकर में प्रवेश करेंगे । और गुरु 30 मार्च 2020 को अपनी स्वराशि धनु से शनि ग्रह की राशि मकर में प्रवेश करेंगे।

30 मार्च 2020 से लेकर 29 जून 2020 तक के गुरु-शनि की युति मकर राशि में रहेंगी और फिर दोबारा  गुरु 30 जून को वक्री होकर धनु राशि में आ जाएंगे और फिर मार्गी हो कर 20 नवंबर को गुरु वापस मकर राशि में संचरण करेंगे।

20 नवम्बर 2020 से लेकर 05 अप्रैल 2021 तक के गुरु-शनि की युति मकर राशि में रहेंगी उस समयावधि में प्राकृतिक विनाश की बड़ी वजह बन सकती है. शनि कष्ट, आपदाओं और काल के कारक ग्रह है।

5 नवम्बर 2019 से लेकर 23 जनवरी 2020 तक, गुरु और शनि धनु राशि में रहेंगे ,धनु राशि में गुरु और शनि की युति भविष्य में होने वाली बड़ी आपदाओं और काल के कारक को जन्म देती है।

30 मार्च 2020 से लेकर 29 जून 2020 तक के गुरु-शनि की युति मकर राशि में रहेंगी यह अवधि प्राकृतिक आपदाओं/ युद्ध की स्थिति / विश्व आर्थिक मंदी (Economic Slowdown )के आमंत्रण का कारण बनती हैं, जिसका परिणाम मानव जाति को भारी विनास के रुप में पड़ता है। इस अवधि में होने वाली घटनाओं का प्रभाव काफी समय तक रहता है।

30 जून 2020 से लेकर 20 नवंबर 2020 तक, गुरु धनु राशि में रहेंगे, पर  गुरु-शनि की युति नहीं रहेंगी उस समय अवधि में परिस्थितियां अनुकूल होगी। ,देश में फैला भय की समाप्ति होगी ।

अस्थिरता समाप्त होगी ,नए रोगियों के संख्या में कमी आएगी, व्यापार में सुधार होगा। पर यह समय काल भविष्य में आने वाली बड़ी आपदाओं के कारण को जन्म भी देती है

20 नवम्बर 2020 से लेकर 05 अप्रैल 2021 तक के फिर से गुरु-शनि की युति मकर राशि में रहेंगी यह अवधि घटनाओं की पुनरावृत्ति होगी प्राकृतिक आपदाओं/ युद्ध की स्थिति / विश्व आर्थिक मंदी ( Economic Slowdown )के आमंत्रण का कारण बनती हैं, जिसका परिणाम मानव जाति को भारी विनास के रुप में पड़ता है।

कोरोना  के कारण भारी मात्रा  में जन-धन की हानि, इस अवधि में होने वाली घटनाओं का प्रभाव काफी समय तक रहता है।

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