Tulsi: पवित्र तुलसी के चिकित्सीय लाभ एवं धार्मिक महत्त्व

Tulsi
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Tulsi ( तुलसी  ): सनातन धर्म में तुलसी को पूजनीय माना जाता है, तुलसी का उल्लेख आते ही मन में पवित्रता का भाव जागृत होता है।  हमारे सनातन धर्म शास्त्रों में तुलसी को पूजनीय, पवित्र और देवी स्वरूप माना गया है।

इसे लक्ष्मी स्वरूप माना गया है। तुलसी के धार्मिक-महत्व के कारण हर-घर आगंन में तुलसी का पौधा अवश्य पाया जाता है और उसकी पूजा की जाती है. प्राचीन काल से ही यह परंपरा चली आ रही है।

तुलसी का धार्मिक महत्व होने के साथ-साथ तुलसी औषधीय गुणों से भी भरपूर है। आयुर्वेद में इसे संजीवनी बुटि के समान माना जाता है।

भारत के भारतीय संस्कृति के चिर पुरातन ग्रंथ वेदों में भी तुलसी के गुणों एवं उसकी उपयोगिता का वर्णन मिलता है।

चरक संहिता और सुश्रुत-संहिता में भी तुलसी के गुणों के बारे में विस्तार से वर्णन है हमारे ऋषियों को लाखों वर्ष पूर्व तुलसी के औषधीय गुणों का ज्ञान था इसलिए इसको को दैनिक जीवन में प्रयोग हेतु इतनी प्रमुखता से स्थान दिया गया है।

तुलसी का पौधा घर में रहने से उसकी सुगंध वातावरण को पवित्र बनाती है और हवा में मौजूद बीमारी फैलाने वाले कई सूक्ष्म कीटाणुओं को नष्ट करता है।

तुलसी एक औषधीय पौधा है जिसमें विटामिन (Vitamin) और खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। तुलसी में अनेक जैव सक्रिय रसायन पाए गए हैं, जिनमें ट्रैनिन, सैवोनिन, ग्लाइकोसाइड और एल्केलाइड्स प्रमुख हैं।

तुलसी में कई ऐसे औषधि गुण होते हैं जो कई बीमारियों को दूर करने और उनकी रोकथाम करने में सहायक हैं।

रोगों को दूर करने और शारीरिक शक्ति बढ़ाने वाले गुणों से भरपूर होता है आयुर्वेद में तो तुलसी को उसके औषधीय गुणों के कारण विशेष महत्व दिया गया है।

इसके अतिरिक्त ऐलोपैथी, होमियोपैथी और यूनानी दवाओं में भी तुलसी का किसी न किसी रूप में प्रयोग किया जाता है।

तुलसी ऐसी औषधि है जो ज्यादातर बीमारियों में काम आती है।औषधीय उपयोग की दृष्टि से तुलसी की पत्तियां ज्यादा गुणकारी मानी जाती हैं। इनको आप सीधे पौधे से लेकर खा सकते हैं।

तुलसी की एक पत्ती रोज सेवन करने से हमें श्वास संबंधी कई रोगों से बचाती है। इन पत्तियों में कफ वात दोष को कम करने, पाचन शक्ति एवं भूख बढ़ाने और रक्त को शुद्ध करने वाले गुण होते हैं।

इसके अलावा तुलसी के पत्ते का फायदे बुखार, दिल से जुड़ी बीमारियां, पेट दर्द, मलेरिया और बैक्टीरियल संक्रमण आदि में बहुत फायदेमंद हैं। साथ ही हम सामान्य बुखार से बचे रहते हैं।

मौसम परिवर्तन के समय होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से बचाव होता है।

तुलसी की पत्ती सेवन करने से हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है, इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, खॉसी, दंत रोग और श्वास सम्बंधी रोग के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है।

तुलसी का वानस्पतिक नाम Ocimum sanctum (ओसीमम् सेंक्टम्) है। तुलसी की कई प्रजातियां मिलती हैं। धार्मिक दृष्टिकोण से दो प्रधान प्रजातियाँ हैं. जिनमें राम तुलसी (श्वेत,श्री तुलसी) और कृष्ण तुलसी प्रमुख हैं।

श्री तुलसी जिसकी पत्तियाँ हरी होती हैं तथा कृष्णा तुलसी जिसकी पत्तियाँ निलाभ-कुछ बैंगनी रंग लिए होती हैं। श्री तुलसी के पत्र तथा शाखाएँ श्वेताभ होते हैं जबकि कृष्ण तुलसी के पत्रादि कृष्ण रंग के होते हैं।

गुण, धर्म की दृष्टि से काली तुलसी को ही श्रेष्ठ माना गया है, परन्तु अधिकांश विद्वानों का मत है कि दोनों ही गुणों में समान हैं।

तुलसी की सामान्यतः निम्न प्रजातियाँ पाई जाती हैं:

  • कृष्ण, काली तुलसी (गम्भीरा या मामरी)
  • राम तुलसी (वन तुलसी / अरण्यतुलसी)
  • मरुआ तुलसी (मुन्जरिकी या मुरसा)
  • कर्पूर तुलसी

तुलसी का पौधा सामान्तया 30 से 60 सेमी तक ऊँचा होता है और इसके फूल छोटे-छोटे सफेद और बैगनी रंग के होते हैं। इसका पुष्पकाल एवं फलकाल जुलाई से अक्टूबर तक होता है।

अन्य भाषाओं में तुलसी के नाम (Name of Tulsi in Different Languages)

संस्कृत: तुलसी,देवदुन्दुभि, सुलभा, बहुमञ्जरी, गौरी, भूतघ्नी

हिंदी: तुलसी,वृन्दा, राम तुलसी,कृष्णतुलसी,

मराठी: तुळस

शास्त्रों के अनुसार बताई गई तुलसी के संबंध में खास बातें

घर में तुलसी हो तो कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। यदि ये बातें ध्यान रखी जाती हैं तो सभी देवी-देवताओं की विशेष कृपा हमारे घर पर बनी रहती है। घर में सकारात्मक और सुखद वातावरण बना रहता है और परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।

इन दिनों में नहीं तोड़ना चाहिए तुलसी के पत्ते

शास्त्रों के अनुसार तुलसी के पत्ते कुछ खास दिनों में जैसे एकादशी, रविवार और सूर्य या चंद्र ग्रहण काल में और रात के समय तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। बिना उपयोग तुलसी के पत्ते कभी नहीं तोड़ने चाहिए। ऐसा करने पर व्यक्ति को दोष लगता है।

रोज करें तुलसी का पूजन

हर रोज तुलसी पूजन करना चाहिए ऐसी मान्यता है कि जो लोग शाम के समय तुलसी के पास दीपक लगाते हैं, उनके घर में महालक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है।

तुलसी से दूर होते हैं वास्तु दोष

तुलसी घर-आंगन में होने से कई प्रकार के वास्तु दोष भी समाप्त हो जाते हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी बनी रहती है।

तुलसी का पौधा घर में हो तो , सकारात्मक ऊर्जा सक्रिय होती है।

ऐसी मान्यता है कि तुलसी का पौधा होने से नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय नहीं हो पाती है। सकारात्मक ऊर्जा को बल मिलता है।

सूखा पौधा हटाने के बाद तुरंत लगा लेना चाहिए तुलसी का दूसरा पौधा-

एक पौधा सूख जाने के बाद तुरंत ही दूसरा तुलसी का पौधा लगा लेना चाहिए। तुलसी का सूखा पौधा घर में रखना अशुभ माना जाता है। इसी वजह से घर में हमेशा पूरी तरह स्वस्थ तुलसी का पौधा ही लगाया जाना चाहिए।

तुलसी के औषधीय गुण (medicinal uses of Tulsi)

Tulsi

तुलसी आयुर्वेदिक उपचार के लिए काफी प्रभावशाली है।तुलसी की पत्तियां, बीज, टहनी सबके अपने अलग-अलग फायदे हैं। औषधीय उपयोग की दृष्टि से तुलसी की पत्तियां ज्यादा गुणकारी मानी जाती हैं। तुलसी के पत्तों की तरह तुलसी के बीज के फायदे भी अनगिनत होते हैं। आप तुलसी के बीज के और पत्तियों का चूर्ण भी प्रयोग कर सकते हैं। आयुर्वेद में भी तुलसी के फायदों का विस्तृत उल्लेख मिलता है। आइये तुलसी के गुणों, तुलसी के उपयोग और आयुर्वेदिक महत्व के बारे में विस्तार से जानते हैं।

  • साँसों की दुर्गंध दूर करे तुलसी का उपयोग

साँसों की दुर्गन्ध ज्यादातर पाचन शक्ति कमजोर हो जाने के कारण होती है | तुलसी अपने दीपन और पाचन गुण के कारण साँसों की दुर्गन्ध को दूर करने में सहायक होती है | इसमें अपनी स्वाभाविक सुगंध होने के करण भी यह सांसों की दुर्गन्ध का नाश करती है।

  • तुलसी अपच से आराम दिलाती है 

अगर आपकी पाचन शक्ति कमजोर है या फिर आप अपच या अजीर्ण की समस्या से पीड़ित हैं तो तुलसी की 2 ग्राम मंजरी को पीसकर काले नामक के साथ का सेवन करें।

  • चोट लगने पर तुलसी का उपयोग

तुलसी का उपयोग चोट लगने पर भी किया जाता है क्योंकि इसमें रोपण और सूजन को कम करने वाला गुण होता है। तुलसी का यही गुण चोट के घाव एवं उसकी सूजन को भी  ठीक करने में सहायक होता है |

  • तुलसी का उपयोग चेहरे पर लाये निखार

तुलसी का उपयोग चेहरे का खोया हुआ निखार वापस लाने के लिए भी किया जाता है, क्योंकि इसमें रूक्ष और रोपण गुण होता है | जिससे कील मुंहासों को दूर करने मदद मिलती  है इसके अलावा रोपण गुण से त्वचा पर पड़े निशानों और घावों को हटाने में भी सहायता मिलती है | यदि तुलसी का सेवन किया जाये तो इसके रक्त शोधक गुण के कारण अशुद्ध रक्त को शुद्ध कर चेहरे की त्वचा को निखारा जा सकता है |

  • दिमाग के लिए फायदेमंद हैं तुलसी की पत्तियां

तुलसी की पत्तियां दिमाग के लिए भी लाजवाब तरीके से काम करते हैं। इसके रोजाना सेवन से मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ती है और याददाश्त तेज होती है। इसके लिए रोजाना तुलसी की 4-5 पत्तियों को पानी के साथ निगलकर खाएं।

  • सिर दर्द से आराम दिलाती है तुलसी

ज्यादा काम करने या अधिक तनाव में होने पर सिरदर्द होना एक आम बात है। अगर आप भी अक्सर सिर दर्द की समस्या से परेशान रहते हैं तो तुलसी के तेल की एक दो बूंदें नाक में डालें। इस तेल को नाक में डालने से पुराने सिर दर्द और सिर से जुड़े अन्य रोगों में आराम मिलता है।

  • रतौंधी में लाभकारी है तुलसी का रस

कई लोगों को रात के समय ठीक से दिखाई नहीं पड़ता है, इस समस्या को रतौंधी कहा जाता है। अगर आप रतौंधी से पीड़ित हैं तो तुलसी की पत्तियां आपके लिए काफी फायदेमंद है। इसके लिए दो से तीन बूँद तुलसी-पत्र-स्वरस को दिन में 2-3 बार आंखों में डालें।

  • कान के दर्द और सूजन में लाभदायक

तुलसी की पत्तियां कान के दर्द और सूजन से आराम दिलाने में भी असरदार है। अगर कान में दर्द है तो तुलसी-पत्र-स्वरस को गर्म करके 2-2 बूँद कान में डालें। इससे कान दर्द से जल्दी आराम मिलता है।

  • खांसी से आराम

तुलसी की पत्तियों से बने शर्बत को आधी से डेढ़ चम्मच की मात्रा में बच्चों को तथा 2 से चार चम्मच तक बड़ों को सेवन कराने से, खांसी, श्वास, कुक्कुर खांसी और गले की खराश में लाभ होता है।

  • डायरिया और पेट की मरोड़ से आराम

खासतौर पर बच्चों को यह समस्या बहुत होती है। तुलसी की पत्तियां डायरिया, पेट में मरोड़ आदि समस्याओं से आराम दिलाने में कारगर हैं। इसके लिए तुलसी की 10 पत्तियां और 1 ग्राम जीरा दोनों को पीसकर शहद में मिलाकर उसका सेवन करें।

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार: 

तुलसी के नियमित सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रामक बीमारियों से बचाव होता है। तुलसी बीज चूर्ण का कुछ दिन सेवन करने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

 तुलसी माला धारण करने से ह्रदय को शांति मिलती है। बुजुर्ग लोगों ने तुलसी माला अवश्य धारण करनी चाहिए।

Note: अगर आप किसी ख़ास बीमारी के इलाज के लिए तुलसी का उपयोग कर रहें हैं तो आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह ज़रूर लें।

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