Saraswati Mantra: बुद्धि, ज्ञान,संपत्ति, प्रसिद्ध हेतु सरल मंत्र सरस्वती मंत्र का जाप करें

Saraswati Mantra
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Saraswati Mantra :

या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्र वृस्तावता ।

या वीणा वर दण्ड मंडित करा या श्वेत पद्मसना । ।

या ब्रह्माच्युत्त शंकर: प्रभृतिर्भि देवै सदा वन्दिता ।

सा माम पातु सरस्वती भगवती नि:शेष जाड्या पहा ॥१॥

भावार्थ: विद्या की देवी भगवती सरस्वती, कुन्द के फूल, चंद्रमा, हिमराशि और मोती के हार की तरह श्वेत वर्ण की हैं और जो श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, जिनके हाथ में वीणा-दण्ड शोभायमान है, जिन्होंने श्वेत कमलों पर अपना आसन ग्रहण किया है तथा ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश आदि देवताओं द्वारा जो सदा पूजित हैं, वही संपूर्ण जड़ता और अज्ञान को दूर कर देने वाली माँ सरस्वती आप हमारी रक्षा करें।

माता सरस्वती वाणी, कला, संगीत, ज्ञान और मन की शक्ति की देवी हैं। सरस्वती देवी को ‘वाक् देवी ‘ यानी वाणी और ध्वनि की देवी भी कहा जाता है।

देवी सरस्वती को श्वेत वस्त्र पहनें एक सुन्दर स्त्री के रूप में दर्शाया गया है जो पवित्रता का प्रतिक है; श्वेत हंस पर विराजमान हैं जो ज्ञान और सत्य का दर्शाता है; उनके चार हाथ है जिसमे उन्होनें वीणा, पुस्तक स्फटिक माला और पवित्र जल पात्र धारण किये हैं, जो क्रमशः रचनात्मकता और कला के सभी रूप , वेद , ध्यान की शक्तियों का प्रतिक है।

सरस्वती मंत्र- ज्ञान के प्रकाश से मन को प्रकाशित करता है। यह ज्ञान चाहे शैक्षिक क्षेत्र से संबंधित हो या आध्यात्मिक जगत से। यह माना जाता है की सरस्वती मंत्र से चित्त में आत्मविश्वास की वृद्धि होती है। और यह व्यक्ति को प्रबल अभिव्यक्तिशील बनाता है।

सरस्वती मंत्र हमारे वाक शक्ति के विकास में भी सहायता करता है, वाणी दोष का निराकरण करता है और हमारे शब्दों को प्रभावशाली करने में तथा शब्दों के सही चुनाव में हमारी सहायता करता है ।

saraswati mantra

सरस्वती मंत्र ( Saraswati Mantra ) के लाभ:

माता सरस्वती सरस्वती मंत्र की देवी हैं। सरस्वती मंत्र के नियमित जप से वाक् , स्मरण-शक्ति और अध्ययन में एकाग्रता की वृद्धि होती है। सरस्वती मंत्र जप करने वाले की बुद्धि प्रखर होती है। सरस्वती मंत्र के जप से विद्या प्राप्त करना सरल हो जाता है और स्मृति लंबे समय तक रहती है ।

श्रेष्ठ विद्या की प्राप्ति के लिए विद्यार्थी देवी सरस्वती मंत्र का जाप करते हैं। समर्पित भाव से सरस्वती मंत्र का जप करने से अध्ययन उच्च कोटि की सफलता प्राप्त कर सकते हैं। विद्यालयों और विश्व विद्यालयों में नियमित रूप से सरस्वती मंत्र का जाप किया जाता है।

कलाकार, कवि, लेखक और लोक वक्ता सरस्वती मंत्र की सहायता से उपलब्धियों की नई ऊँचाइयों तक पहुंच सकते हैं । देवी सरस्वती की आराधना के कई मंत्र हैं, जिससे उनका आह्वान किया जाता है।

कैसे करें सरस्वती मंत्र का प्रयोग :

प्रात: स्नान इत्यादि से निवृत होने के बाद सरस्वती मंत्र का जाप करना चाहिए । इन मंत्रों का प्रतिदिन स्फटिक की माला या रुद्राक्ष की माला से जप करना चाहिए। जप पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए।

माता सरस्वती का चित्र, प्रतिमा या यंत्र के ऊपर श्वेत चंदन, श्वेत पुष्प व अक्षत भेंट करें और अपनी मनोकामना का मन में स्मरण करके सरस्वती मंत्र का जप (एक माला)108 बार,11 माला या 21 माला मंत्र का जाप किया जाता है। माता सरस्वती प्रसन्न करने के अत्यंत सरल और अचूक मंत्र है।

सरस्वती बीज मंत्र

।। ऐं ।।

सरस्वती मंत्र ( Saraswati Mantra )

।।ॐ ऐं नमः।।

सरस्वती मंत्र

।।ॐ ऐं क्लीं सौः।।

महासरस्वती मंत्र

।।ॐ ऐं महासरस्वत्यै नमः।।

इस सरस्वती मंत्र का पाठ करने से व्यक्ति बहुत सारा ज्ञान प्राप्त कर प्रसिद्ध हो जाता है।

।।वद वद वाग्वादिनी स्वाहा।।

इस सरस्वती मंत्र का पाठ करने से बुद्धि, रचनात्मकता और ज्ञान में वृद्धि होती है।

।।ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः।।

सरस्वती मंत्र संपत्ति और विद्या के लिए मंत्र का पाठ करें।

ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम् कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा ।

कुशायक्षिणी मंत्र

।।ॐ वाड्.मयायै नमः ।।

उदुम्बर यक्षिणी मंत्र

।।ॐ ह्रीं श्रीं शारदायै नमः ।।

 ।।ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः ।।

।।ॐ ह्रीं वेद मातृभ्य: स्वाहा।।

विद्याप्रद गोपाल मंत्र

।।ऐं क्लीन कृष्णाय ह्रीं गोविन्दाय श्रीं गोपीजन बल्लभाय स्वाहा सौ :।।

विद्या गोपाल मंत्र

कृष्ण कृष्ण महाकृष्ण सर्वज्ञ त्वं प्रसीद में । रमा रमण विश्वेश ,विद्या माशु प्रयच्छ में ।।

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