Neelam Ratna: जानिए क्यों है नीलम रत्न बेहद प्रभावशाली रत्न

Neelam Ratna
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Neelam Ratna: नवग्रहों में से शनि शक्तिशाली और लम्बे समय तक असर दिखाने वाला ग्रह होता है। शनि अगर किसी पर मेहरबान हो जाएं तो ये आसमान की बुलंदियों तक पहुंचा सकते हैं।

शनि ग्रह के बुरे प्रभाव और पीड़ा शांत करने के लिए नीलम ( Neelam Ratna ) या नीला पुखराज धारण करने की सलाह दी जाती है। नीलम को हीरे के बाद दूसरा सबसे सुंदर रत्न माना जाता है। इसे नीलमणि, सेफायर, इंद्र नीलमणि, याकूत, नीलम, कबूद भी कहा जाता है। उसी प्रकार शनि का रत्न नीलम चमत्कारी होता है।

नौ रत्नों में से नीलम सबसे प्रभावी और सबसे जल्दी असर करने वाला रत्न होता है। कहा जाता है कि यह रत्न रंक को राजा और राजा को रंक बना सकता है।

असली नीलम चिकना, चमकदार, साफ और मोर के पंख के समान नीली आभा वाला सुंदर और बहुमूल्य  रत्न होता है। रंग के आधार पर नीलम दो प्रकार का होता है – इंद्रनील, जिसका रंग नीले आकाश जैसा होता है और जलनील, जिसका रंग समुद्र के पानी जैसा होता है।

शनि के बारे में माना जाता है कि ये जिस पर प्रसन्न होते हैं, उसे निहाल कर देते हैं और जिस पर कुपित होते हैं, उसे बर्बाद करने में भी पीछे नहीं रहता ।नीलम धारण करने से पहले विशेषज्ञों का परामर्श अवश्य लेना चाहिए।

नीलम ( Neelam Ratna ) बेहद कीमती और कम पाया जाने वाला रत्न है। इसके उपलब्ध ना होने की दशा में एमेथिस्ट, ब्लैकस्टार, या ब्लू टोपाज धारण किया जा सकता है।

उत्तम श्रेणी का नीलम भारत, म्यांमार और श्रीलंका में पाया जाता है। भारत में नीलम का भंडार कश्मीर में है। नीलम का रंग ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

नीलम धारण करने की विधि:

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नीलम  शनिवार के दिन धारण करना शुभ माना जाता है। समस्त रत्नों को धारण करने से पहले उनका शुद्धि संस्कार किया जाना जरूरी है।

नीलम धारण करने के लिए सर्वप्रथम शनिवार के दिन प्रातःकाल स्नानादि से निवृत होकर दैनिक पूजन करें। उसके बाद नीलम को किसी बर्तन में रखकर गंगाजल, कच्चे दूध से धोएं। इसे साफ कपड़े से पोछकर काले या नीले कपड़े पर रखें और शनि मंत्र ‘ॐ शं शनिश्चराय नम:’ मंत्र 108 बार जपकर धारण करें।

नीलम के साथ कोई अन्य रत्न विशेषकर माणिक्य, मोती आदि नहीं पहनना चाहिए। 

नीलम धारण करने वाले जातक के जीवन पर पडने वाले सकारात्मक प्रभाव :

  • नीलम जब किसी व्यक्ति को सकारात्मक परिणाम देता है तो कुछ ही दिनों में वह उस व्यक्ति को सुख-संपदा और ऐश्वर्य से परिपूर्ण बना देता है
  • माना जाता है कि नीलम धारण करने से ज्ञान तथा धैर्य की वृद्धि होती है।
  • नीलम वाणी में मिठास, अनुशासन तथा विनम्रता पैदा करता है।
  • नीलम में उत्कृष्ट चिकित्सा क्षमता भी होती है यह पाचन में सुधार, सुस्ती को दूर करता है और एकाग्रता को बेहतर बनाने में मदद करता है। इंद्रियों को शांत रख शांति और धैर्य प्रधान करता है।
  • यह नाम, प्रसिद्धि और प्रतिष्ठा प्रदान करता है। राजनेताओं और राजनीति से जुड़े लोगों के लिए नीलम लाभकारी माना जाता है। कहा जाता है कि इसे धारण करने से नेतृत्व क्षमता बढ़ती है।

कुंडली में शनि की दशा अथवा स्थिति के अनुरूप नीलम धारण का परामर्श दिया जाता है:

  • शनि मकर और कुंभ राशि का स्वामी है। मकर तथा कुंभ लग्न के जातकों के लिए नीलम धारण करना लाभकारी साबित होता है।
  • जिन लोगों को शनि साड़ेसाती के प्रभावों से परेशानी हो रही हो उन्हें भी नीलम धारण करने की सलाह दी जाती है।
  • कुंडली में अशुभ शनि यदि 11 से 20 अंश तक रहने पर 11 रत्ती का नीलम धारण करना चाहिए।
  • कुंडली में अशुभ शनि यदि 21 से 29 अंश तक हो तो तीन रत्ती का नीलम धारण करना प्रभावी रहता है।
  • मेष, वृष, तुला एवं वृश्चिक लग्न वाले अगर नीलम को धारण करते हैं तो उनका भाग्योदय होता है।
  • चौथे, पांचवे, दसवें और ग्‍यारवें भाव में शनि हो तो नीलम जरूर पहनना चाहिए।
  • शनि छठें और आठवें भाव के स्वामी के साथ बैठा हो या स्वयं ही छठे और आठवें भाव में हो तो भी नीलम रत्न धारण चाहिए।
  • शनि की दशा अंतरदशा में भी नीलम धारण करना लाभदायक होता है।
  • शनि की सूर्य से युति हो, वह सूर्य की राशि में हो या उससे दृष्ट हो तो भी नीलम पहनना चाहिए।
  • कुंडली में शनि मेष राशि में स्थित हो तो भी नीलम पहनना चाहिए।
  • कुंडली में शनि वक्री, अस्तगत या दुर्बल अथवा नीच का हो तो भी नीलम धारण करके लाभ होता है।

नीलम ( Neelam Ratna ) धारण करने से पूर्व विशेषज्ञों की राय अवश्य लेना चाहिए।

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