Moti Stone: जानिए मोती रत्न धारण करने की विधि एवं फायदे

Moti Stone
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Moti Stone: हर सभ्यता और संस्कृति में आभूषण के मामले में मोती बड़ा ही महत्व रखता है। मोती जिसे अंग्रेजी में पर्ल कहते हैं यह शब्द फ्रेंच से लिया गया है जबकि हिन्दी में यह मोती के रूप में प्रसिद्ध है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मोती, चंद्र गृह का प्रतिनिधित्व करता है। मोती रत्न चंद्रमा से संबंधित सभी दोषों का निवारण करता है।

यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा किसी शुभ भाव में स्थित है तो उससे मिलने वाले प्रभाव को और बढ़ाने के लिए या जिनकी जन्म कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो उन्हें मोती अवश्य धारण करना चाहिए।

सचे मोती ( Moti Stone ) का निर्माण सीपियों के अंदर समुद्र की गहराइयों में होता हैं। ये सफेद चमकदार और कई आकार में होते हैं लेकिन गोल मोती ही सबसे अच्छा माना जाता है।

इसके अलावा मोती कई रंगों जैसे गुलाबी और काले आदि तरह के कलर में उपलब्ध होते हैं। मोती में क्रिस्टल के समान आध्यात्मिक गुण भी होते हैं।

आभूषण के मामले में मोती बेहद लोकप्रिय है, महिलाएं इस आकर्षक रत्न को हार और अंगूठी में पहनना पसंद करती हैं। आभूषण का शौक रखने वाले लोगों में काले मोती का हार बेहद लोकप्रिय है।

प्राचीन काल से ही रत्नों में मोती का बड़ा महत्व है। मोती में कुछ चिकित्सीय गुण भी पाये जाते हैं, विशेषकर एशियाई मूल की मेडिकल व्यवस्था में इसका प्रयोग किया जाता है।

मोती रत्न ( Moti Stone ) की रासायनिक संरचना:

वैज्ञानिक रूप से मोती कैल्शियम कार्बोनेट है। इसमें 82-86% कैल्शियम कार्बोनेट, 10-14% कनशियोलिन और 2-4% पानी होता है। इसका रासायनिक सूत्र (CaCO3 and H2O) है। इसकी कठोरता 3.5 – 4 व विशेष घनत्व 2.65-2.85 होता है।

मोती रत्न धारण करने की विधि:

6 से 8 कैरेट के बीच का मोती चांदी की अंगूठी में बनवाकर कनिष्का अंगुली में पहना जाता है। मोती को धारण करने से पहले इसको कच्चे दूध और गंगाजल में डालकर शुद्धिकरण किया जाना चाहिए।

भगवान शिव और माता पार्वती को पुष्प, अक्षत व सुंगधित अगरबत्ती लगाएं और चंद्रमा के बीज मंत्र ‘’ ।।ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:।।” का 108 बार जाप करें।

रत्न के शुद्धिकरण और पूजन के बाद मोती को सोमवार या पूर्णिमा के दिन या हस्त, रोहिणी और श्रवण नक्षत्र में धारण करना चाहिए।

ज्योतिषीय महत्व:

जन्म कुंडली में चंद्रमा लाभ भाव में स्थित रहता है तो उसके प्रभाव को और बढ़ाने के लिए मोती धारण करना चाहिए। ऐसा कहा जाता है कि मन को शांति प्रदान करने और चिंतामुक्त रहने के लिए मोती अवश्य पहनना चाहिए।

इस धारण करने से रिश्तों में सद्भाव बना रहता है और आत्म विश्वास में बढ़ोत्तरी होती है। मोती ब्लड प्रेशर और ब्लाडर जैसे कई रोगों को नियंत्रित भी करता है।

यदि चंद्रमा किसी बुरे भाव में स्थित रहता है और ऐसे में अगर कोई मोती पहनता है, तो यह उसके लिए कष्टकारी भी साबित हो सकता है। क्योंकि चंद्रमा के बुरे प्रभाव से मानसिक विकार भी उत्पन्न हो सकते हैं। इसलिए मोती रत्न पहनने से पहले यह जानना बहुत ही जरूरी है कि आपकी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति क्या है

मोती ( Moti Stone ) के फायदे:

Moti Stone

  • मोती चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करता है और चंद्रमा मन का कारक होता है, इसलिए मोती धारण करने से मन स्थिर रहता है व नकारात्मक विचारों का नाश होता है।
  • मोती के प्रभाव से रिश्तों में मधुरता बनी रहती है, विशेषकर पति-पत्नी के संबंधों में। क्योंकि यह रिश्तों में स्नेह,विश्वास और देखभाल को दर्शाता है।
  • मोती धारण करने से आत्म विश्वास में वृद्धि होती है और जीवन में समृद्धता आती है।
  • मोती शारीरिक शक्ति में बढ़ोत्तरी करता है और बुरी ताकतों से आपकी रक्षा करता है।
  • मोती के प्रभाव से स्मरण शक्ति में भी वृद्धि होती है और यह कलात्मकता, संगीत,कला और स्नेह के प्रति उत्तेजित करता है।

प्राकृतिक रत्नों के बारे में कैसे जानें:

अधिकतर रत्न खदानों से प्राप्त होते हैं, लेकिन मोती का निर्माण समुद्री जीव करते हैं। समुद्र में कीट या सीपियों द्वारा मोती का निर्माण किया जाता है।

इस वजह से इसकी उपलब्धता अक्सर मुश्किल व कम होती है। मोती एकदम चमकदार और कई आकार में होते हैं लेकिन गोल मोती को सबसे अच्छा माना जाता है।

आजकल मोती ( Moti Stone ) का कल्चर भी शुरू हो गया है। इस व्यवस्था में समुद्र से सीपियों को पालकर उन्हें ऐसी अवस्था में रखा जाता है कि, उनमें मोतियों का उत्पादन हो सके, इस प्रक्रिया को पर्ल कल्चर कहते हैं।

सदी की शुरुआत से लेकर अब तक मोती को प्राप्त करने का काम बहुत ही कठिन माना जाता है।

समुद्र की गहराई में 100 फीट तक अंदर जाकर मोती प्राप्त करना बहुत ही जोखिम भरा कार्य है और इसमें सफलता की संभावना भी कम रहती है। क्योंकि समुद्र में एक सीप के अंदर अच्छी क्वालिटी के सिर्फ दो या तीन मोती ही मिलते हैं।

सूचना: हम सभी पाठकों को यह सुझाव देते हैं कि कोई भी रत्न पहनने से पहले एक बार ज्योतिषीय परामर्श अवश्य लें।

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