Manik Ratna: जानिए माणिक रत्न की विशेषताएं एवं धारण करने की विधि

Manik Ratna
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Manik Ratna:  वैदिक ज्योतिष के अनुसार माणिक्य रत्न, सूर्य का प्रतिनिधित्व करता है। इस रत्न पर सूर्य का स्वामित्व है! यह लाल या हलके गुलाबी रंग का होता है।

यह एक मूल्यवान रत्न होता है, यदि जातक की कुंडली में सूर्य शुभ प्रभाव में होता है तो माणिक्य रत्न धारण करना चाहिए, इसके धारण करने से धारण करता को अच्छे स्वास्थ्य के साथ साथ पद-प्रतिष्ठा, अधिकारीयों से लाभ प्राप्त होता है।

शत्रु से सुरक्षा, ऋण मुक्ति, एवं आत्म स्वतंत्रता प्रदान होती है और यह उच्च कोटि का मान-सम्मान एवम पद की प्राप्ति करवाता है।

सत्ता और राजनीती से जुड़े लोगो को माणिक्य अवश्य धारण करना चाहिए क्योकि यह रत्न सत्ता धारियों को एक उचे पद तक पहुचाने में बहुत सहायता कर सकता है।

माणिक, कुरुविंद या रूबी (ruby) एक रत्न है जो गुलाबी रंग से लेकर रक्तवर्ण तक का होता है। इसका लाल रंग इसमें क्रोमियम की उपस्थिति के कारण होता है।

इसका ‘रूबी’ नाम लैटिन शब्द रुबेर (ruber) से आया है जिसका अर्थ लाल होता है। चार प्रमुख बहुमूल्य रत्नों में माणिक भी है; अन्य तीन हैं – सफायर (sapphire), एमराल्ड (emerald), तथा हीरा।

यह अनार के दाने-सा दिखने वाला गुलाबी आभा वाला रत्न बहुमूल्य है। जो संसार के विभिन्न स्थलों में पाया जाता है। सबसे उत्तम बर्मा का माणिक माना गया है।

भारत में भी माणिक ( Manik Ratna ) प्राप्त होता है। असम, बिहार ,मद्रास मध्यप्रदेश, उड़ीसा तथा मैसूर में यह पत्थर मिलता है। मैसूर, मद्रास और कश्मीर में प्राप्त होनेवाली यह कठोर होता है माणिक की कठोरता 9 है, जबकि हीरे की कठोरता 10 होती है।

इसका विशिष्ट गुरुत्व 3.94 से 4.10 होता है। यह ऐल्यूमिनियम का प्राकृतिक आक्साइड (Al2 O3) है।

माणिक्य ( Manik Ratna ) धारण करने की विधि:

यदि आप माणिक्य धारण करना चाहते है तो 5 से 7 कैरेट का लाल या हलके गुलाबी रंग का पारदर्शी माणिक्य ताम्बे की या स्वर्ण अंगूठी में जड्वाकर किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम रविवार के दिन सूर्य उदय के पश्चात् अपने दाये हाथ की अनामिका में धारण करे।

अंगूठी के शुधिकरण और प्राण प्रतिष्ठा करने के लिए सबसे पहले अंगूठी को दूध, गंगाजल, शहद, और शक्कर के घोल में डुबो कर रखे, तत्पश्चात अंगूठी को जल से निकालकर IIॐ घ्रणिः सूर्याय नम:II मन्त्र का जाप 108 बार करे और अंगूठी के ऊपर अगरबती घुमाये और फिर पांच अगरबत्ती सूर्य देव के नाम जलाए और प्रार्थना करे की हे सूर्य देव मै आपका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए आपका प्रतिनिधि रत्न धारण कर रहा हूँ! मुझे आशीर्वाद प्रदान करे ।

अंगूठी को विष्णु या सूर्य देव के चरणों से स्पर्श करवा कर अनामिका में धारण करे! माणिक्य धारण तिथि से बारह दिन में प्रभाव देना प्रारंभ करता है और लगभग चार वर्ष तक पूर्ण प्रभाव देता है फिर निषक्रिय हो जाता है।

माणिक्य धारण करने के नियम और सावधानियां क्या हैं:

  •  माणिक्य गुलाबी या लाल रंग का पारदर्शी होना चाहिए।
  •  इसको सोने या ताम्बे में पहनना चाहिए।
  •  इसको अनामिका अंगुली या गले में रविवार को धारण करना चाहिए।
  •  इसके साथ हीरा, ओपल, नीलम और गोमेद न पहनें।
  •  माणिक्य के साथ पीला पुखराज धारण करना सर्वोत्तम होता है।

माणिक्य ( Manik Ratna ) का उपरत्न :

माणिक्य के स्थान पर कई बार ज्योतिषी गार्नेट (Red garnet) भी धारण करने की सलाह देते हैं।

माणिक्य के तथ्य : –

माणिक्य रत्न ( Manik Ratna ) के बारे में कहा जाता है कि जब किसी व्यक्ति के साथ कुछ अनहोनी घटित होने वाली हो तो यह रत्न स्वयं अपना रंग परिवर्तित कर लेता है।

कई लोग मानते हैं कि माणिक्य विष के प्रभाव को भी कम कर देता है।

माणिक्य के लाभ और नुक्सान क्या हैं:

Manik Ratna

लाभ होने पर चेहरा चमकने लगता है और आत्मविश्वास बढ़ जाता है।

राजकीय कार्य और प्रशासन में विशेष लाभ होता है।

पिता और परिवार से रिश्ते अच्छे होने लगते हैं।

अगर नुक्सान करे तो लगातार सर दर्द होने लगता है।

हड्डियों में और आंखों में समस्या होने लगती हैं।

अपयश की तथा पारिवारिक जीवन की समस्याएं होने लगती हैं।

किस रत्न के साथ पहनें :-

माणिक ( Manik Ratna ) को मोती के साथ पहन सकते हैं, तो पुखराज के साथ भी पहन सकते हैं। मोती के साथ पहनने से पूर्णिमा नाम का योग बनता है।

जबकि माणिक व पुखराज प्रशासनिक क्षेत्र में उत्तम सफलता का कारक होता है।

माणिक व मूंगा भी पहन सकते हैं, ऐसा जातक प्रभावशाली व कोई प्रशासनिक क्षेत्र में सफलता पाता है।

वृषभ लग्न में केन्द्र चतुर्थ का स्वामी होता है सूर्य कि स्थितिनुसार इस लग्न के जातक भी माणिक पहन सकते हैं।

इसे पुखराज, मूंगा के साथ भी पहना जा सकता है।

पन्ना व माणिक भी पहन सकते है, इसके पहनने से बुधादित्य योग बनता है। जो पहनने वाले को दिमागी कार्यों में सफल बनाता है

माणिक, पुखराज व पन्ना भी साथ पहन सकते हैं।  माणिक के साथ नीलम व गोमेद नहीं पहना जा सकता है।

किन लोगों को माणिक्य धारण करना चाहिए:

सिंह लग्न के जातकों के लिए माणिक्य रत्न धारण करना अत्यंत लाभकारी माना गया है।

मेष, सिंह और धनु लग्न में माणिक्य सर्वोत्तम होता है।

कर्क, वृश्चिक और मीन लग्न में साधारण परिणाम देता है।

वृषभ लग्न में विशेष दशाओं में माणिक्य धारण कर सकते हैं।

अगर कुंडली नहीं है तो जरूरत के अनुसार माणिक्य धारण करें, परन्तु पहले इसकी जांच कर लें।

किन लोगों को माणिक्य ( Manik Ratna ) धारण नहीं करना चाहिए:

कन्या, मकर, मिथुन, तुला और कुम्भ लग्न में माणिक्य धारण करना खतरनाक हो सकता है।

जिन लोगों को उच्च रक्तचाप या ह्रदय रोग है उन्हें बहुत सोच समझकर ही माणिक्य पहनना चाहिए।

जिन लोगों का सम्बन्ध पिता के साथ ठीक नहीं है, उन्हें भी माणिक्य नुक्सान कर सकता है।

जो लोग शनि से सम्बंधित क्षेत्रों में हैं, उन्हें भी माणिक्य धारण नहीं करना चाहिए।

सावधानी:  बिना कुंडली देखे और बिना ज्योतिषी की सलाह माणिक्य या अन्य रत्न धारण नहीं करना चाहिए।

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