Giloy: जानिए अमरता का आयुर्वेदिक जड़ गिलोय के अनेक फायदे

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Giloy: आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से गिलोय को विषाणु एवं रोगाणु जनित रोगों को दूर करने में सबसे उत्तम औषधि के रूप में मान्यता है। आयुर्वेद में गिलोय को रोगाणु नाशक रसायन माना गया है।

यह शरीर को प्रभावित करने वाले रोगाणुओं को नष्ट करती है। आधुनिक आयुर्वेदाचार्यों (चिकित्साशात्रियों) के अनुसार गिलोय का उपयोग अनेक गंभीर रोगों में किया जा सकता है।

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गिलोय ( Giloy ) एक ऐसी औषधि है, जिसे मानव शरीर के लिए अमृत तुल्य वनस्पति माना जाता है। गिलोय अमृता, अमृतवल्ली, गिलोय के बारे में आयुर्वेदिक ग्रंथों में बहुत सारी फायदेमंद बातें बताई गई है।

गिलोय का उपयोग से बुखार, उलटी, सूखी खाँसी, हिचकी, बवासीर, टीबी, मूत्र रोग में लाभ ले सकते हैं और डायबिटीज, कुष्ठ और पीलिया रोग में भी प्रयोग की जाती है।

इसके साथ ही यह वीर्य और बुद्धि बढ़ाती है और महिलाओं की शारीरिक कमजोरी की स्थिति में यह बहुत अधिक लाभ पहुंचाती है। गिलोय टीबी रोग का कारण बनने वाले वाले जीवाणु की वृद्धि को रोकती है।

आंत और यूरीन सिस्टम के साथ-साथ पूरे शरीर को प्रभावित करने वाले रोगाणुओं को भी यह खत्म करती है।

गिलोय ( Giloy ) एक बड़ी लता रूप में विकसित होती है। यह जिस पेड़ पर चढ़ती है, उस वृक्ष के कुछ गुण भी इसके अन्दर आ जाते हैं। इसीलिए नीम के पेड़ पर चढ़ी गिलोय सबसे अच्छी मानी जाती है।

गिलोय ( Giloy ) के नाम

गिलोय का लैटिन नाम टिनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया (Tinospora cordifolia)

  • Hindi–गिलोय, अमृता, गडुची
  • English – इण्डियन टिनोस्पोरा (Indian tinospora), हार्ट लीव्ड टिनोस्पोरा (Heart leaved tinospora)
  • Goa – अमृतबेल (Amrytbel)
  • Persian – गुलबेल (Gulbel), गिलोय (Giloe)

 गिलोय के फायदे (Giloy Benefits and Uses)

गिलोय के औषधीय गुण और गिलोय के फायदे बहुत तरह के बीमारियों के लिए उपचारस्वरूप इस्तेमाल किया जाता है

पुराना बुखार में गिलोय से लाभ

गिलोय को ज्वरनाशक भी कहा जाता है। अगर कोई व्यक्ति काफी दिनों से किसी भी तरह के बुखार से पीड़ित है और काफी दवाएं लेने के बाद भी बुखार में कोई आराम नहीं मिल रहा हो, तो ऐसे व्यक्ति को रोजाना गिलोय घन वटी का सेवन करना चाहिए इसे दिन में तीन बार लेने से पुराना बुखार ठीक हो जाता है।

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गिलोय के रस में पिप्पली तथा एक चम्मच मधु मिला लें। इसे सुबह और शाम सेवन करने से पुराना बुखार, कफ, खांसी, अरुचि आदि रोग ठीक होते हैं।

 इम्यूनिटी बढ़ाएं

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गिलोय में एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं, जो खतरनाक रोगों से लड़कर शरीर को सेहतमंद रखते है। गिलोय किडनी और लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है और खून को साफ करती है।

नियमित रूप से गिलोय घन वटी, गिलोय का जूस या गिलोय पाउडर को आंवले के चूर्ण के साथ नियमित रूप से करने से शरीर में खून के प्लेटलेट्स की गिनती को बढ़ाती है। जिस से रोगों से लड़ने की क्षमता में बढ़ोत्तरी होती है।

सर्दी-खांसी दूर भगाए

किसी व्यक्ति को लगातार सर्दी-खांसी-जुकाम की समस्या हो रही हो तो उन्हें गिलोय के रस का सेवन कराएं। दो चम्मच गिलोय का रस हर रोज सुबह लेने से खांसी से काफी राहत मिलती है। यह उपाय तब तक आजमाएं, जब तक खांसी पूरी तरह ठीक न हो जाए।

एनीमिया में लाभ

इसके अलावा अगर पेट में कीड़े हो गए हों और कीड़े के कारण शरीर में खून की कमी हो रही हो तो पीड़ित व्यक्ति को कुछ दिनों तक नियमित रूप से गिलोय घन वटी या गिलोय का सेवन करने से शरीर खून की कमी दूर होती है और एनीमिया की समस्या (Anemia Problem) से राहत मिलती है

त्रिदोष से होने वाले रोग में लाभ

गिलोय एक शामक औषधि है, गिलोय रस में त्रिफला मिलाकर काढ़ा बनायें जिसका नियमित रूप से सेवन करने से

शरीर में पैदा होने वाली वात, पित्त और कफ (त्रिदोष) से होने वाली बीमारियों से लाभ मिलता है।

पाचन नियमित करता है

गिलोय घन वटी या गिलोय के रस का नियमित रूप से सेवन करने से पेट के हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट होते हैं जिस से हमारा पाचन तंत्र ठीक रहता है

मोटापा दूर करे

मोटापा से परेशान व्यक्ति को रोजाना गिलोय का सेवन करना चाहिए। इसके एक चम्मच रस में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से मोटापा दूर हो जाता है।

आँखों के रोग में फायदेमंद और आंखों की रोशनी बढ़ाये

गिलोय के औषधीय गुण आँखों के रोगों से राहत दिलाने में बहुत मदद करते हैं। जिनकी आंखों की रोशनी कम हो रही हो, उन्हें गिलोय के रस को आंवले के रस के साथ देने से आंखों की रोशनी भी बढ़ती है और आंख से संबंधित रोग जैसे आंख में अँधेरा छाना, आंख में चुभन, और काला तथा सफेद मोतियाबिंद रोग ठीक होते हैं।

कान की बीमारी में लाभ

गिलोय के तने को पानी में घिसकर गुनगुना कर लें। इसे कान में 2-2 बूंद दिन में दो बार डालने से बिना कोई नुकसान पहुँचाये कान का मैल (कान की गंदगी) निकल जाता है।

डायबिटीज में फायदेमंद

जिन लोगों को डायबिटीज की बीमारी है, उन्हें गिलोय के रस का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। डायबिटीज के मरीजों के लिए यह वरदान है।

ऐसे लोगों को हाथ की छोटी उंगली के बराबर गिलोय के तने का रस और बेल के एक पत्ते के साथ थोड़ी सी हल्दी मिलाकर एक चम्मच रस का रोजाना सेवन करना चाहिए। इससे डायबिटीज की समस्या नियंत्रित हो जाती है।

हिचकी को रोकने के लिए करें गिलोय का इस्तेमाल

गिलोय ( Giloy ) तथा सोंठ के चूर्ण को नसवार की तरह सूँघने से हिचकी बन्द होती है। गिलोय चूर्ण एवं सोंठ के चूर्ण की चटनी बना लें। इसमें दूध मिलाकर पिलाने से भी हिचकी आना बंद हो जाती है।

गिलोय के नुकसान (Side Effects of Giloy)

गिलोय का औषधीय प्रयोग, प्रयोग की मात्रा और तरीका का सही ज्ञान होना ज़रूरी है

गिलोय डंठल का ही प्रयोग करना चाहिए। इसके के पत्तों का सेवन नहीं करना चाहिए।

अधिक मात्रा में गिलोय का सेवन न करें, अन्यथा मुंह में छाले हो सकते हैं।

इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

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