Gayatri Mantra: गायत्री मंत्र का महत्व एवं लाभ

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Gayatri Mantra:  गायत्री मंत्र सर्वप्रथम ऋग्वेद में उद्धृत हुआ है। इसके ऋषि विश्वामित्र हैं और देवता सविता हैं। वेद माता गायत्री देवी को गायत्री मंत्र की देवी माना गया है।

गायत्री देवी लाल कमल पर विराजमान हैं जो संपत्ति का सूचक है; वह एक श्वेत हंस के साथ हैं जो शुद्धता का प्रतिक है; वह एक हाथ में पुस्तक और एक में औषधि धारण किये हुए हैं जो ज्ञान और स्वास्थ्य का सूचक है।

उन्हें ५ शीर्ष के साथ दिखाया गया है जो ‘पंच प्राण ‘ या ‘पंच इन्द्रियों’ के प्रतिक के रूप में हैं। सविता यानि गायत्री, सवित्र यानि सूर्य है। गायत्री मंत्र प्रकाश और जीवन के अनंत स्रोत सूर्य की प्रार्थना है। जो सभी विषयों में बुद्धि का मार्गदर्शन करके हमारी चेतना जगाता है।

गायत्री मंत्र का जप प्रातःकाल और सांयकाल में सूर्य देवता के समक्ष किया जा सकता है। मुख्यतः गायत्री मंत्र में २४ अक्षर होते हैं। जो चौबीस सिद्धियों-शक्तियों के प्रतीक हैं। गायत्री मंत्र का जप सार्वभौमिक चेतना की प्राप्ति और सहज ज्ञान युक्त शक्तियों के जागृति के लिए होता है।

गायत्री मंत्र का नियमित जप प्राण शक्ति सक्रिय करता है, अच्छा स्वास्थ्य, ज्ञान, मानसिक शक्ति, समृद्धि और आत्मज्ञान प्रदान करता है। परम सत्य की ओर अग्रसर करके ईश्वर का परम बोध कराता है। विद्यार्थियों के लिए गायत्री मंत्र को चमत्कारिक मंत्र माना जाता है।

गायत्री मंत्र:

       ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् , भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ||  

हिन्दी में भावार्थ 

उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अपनी अन्तरात्मा में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करे।

मंत्र जप विधि:

  • गायत्री मंत्र का जाप सूर्योदय होने से दो घंटे पहले से सूर्यास्त से एक घंटे पहले तक किया जा सकता है।
  • सुबह के समय कुशा के आसन पर बैठे पूर्वदिशा तरफ गाय के घी का दिया जलाएं और रुद्राक्ष की माला से गायत्री मंत्र का जाप करें
  • जाप से पहले तांबे के लोटे में गंगाजल भरकर अवश्य रखें जाप संपूर्ण होने पर घर में इसका छिड़काव करें
  • गायत्री मंत्र विद्यार्थियों के लिए बहुत ही लाभकारी है।
  • नियमित रूप से 108 बार (एक माला) गायत्री मंत्र का जप करने से बुद्धी प्रखर और विषय को याद रखने की क्षमता बढ़ जाती है।

गायत्री मंत्र के २४ प्रकार है। जो अलग-अलग प्रयोजन के लिए जपे जाते हैं। कुछ निम्न प्रकार हैं …

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विष्णु गायत्री मंत्र

इस मंत्र का जप मेधावी बनने के लिए होता है।

ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाये धीमहि, तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् |

लक्ष्मी गायत्री मंत्र

लक्ष्मी गायत्री मंत्र का जप समृद्धि और सफलता प्राप्ति के लिए किया जाता है।

ॐ महादेव्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि, तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् |

नारायण गायत्री मंत्र

यह मंत्र जप अपने कार्य की सिद्धि के लिए किया जाता है।

ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि, तन्नो नारायणः प्रचोदयात् |

कृष्णा गायत्री मंत्र

कृष्णा गायत्री मंत्र का जप आकर्षण के लिए होता है।

ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि, तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् |

शिव गायत्री मंत्र

यह मंत्र दीर्घायु होने के लिए जपा जाता है।

ॐ महादेवाय विद्महे रुद्र मूर्तये धीमहि, तन्नो शिवः प्रचोदयात् |

गणेश गायत्री मंत्र

गणेश गायत्री मंत्र का जप बाधाओं से मुक्ति के लिए होता है।

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात् |

ब्रह्म गायत्री मंत्र

।।ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यम्। ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् । ॐ आपो ज्योति रासोsमृतं ब्रह्म भूर्भुवः स्वरोम् ।।

सर्व शांति हेतु

।।ॐ भूर्भवः स्वः ॐ तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि ॐ धियो यो नः प्रचोदयात् ॐ।।

विद्या प्राप्ति हेतु

।। ऐं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि ऐं धियो यो नः प्रचोदयात् ऐं ।।

लक्ष्मी प्राप्ति हेतु

।।श्रीं भूर्भवः स्वः श्रीं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि श्रीं धियो यो नः प्रचोदयात् श्रीं।।

कामना सिद्धि हेतु

।।ह्रीं भूर्भवः स्वः ह्रीं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि ह्रीं धियो यो नः प्रचोदयात् ह्रीं ।।

वशीकरण हेतु

।।क्लीं भूर्भवः स्वः क्लीं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि क्लीं धियो यो नः प्रचोदयात् क्लीं।।

शत्रुनाश हेतु

।।क्रीं भूर्भवः स्वः क्रीं तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि क्रीं धियो यो नः प्रचोदयात् क्रीं।।

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