Bhringraj: जानिए क्या है आयुर्वेदिक चिकित्सा में भृंगराज का महत्त्व

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Bhringraj: भृंगराज (एक्लीप्टा अल्बा) एक जड़ी बूटी है, जिसका काम शरीर को स्वस्थ बनाए रखना है। इसके प्रयोग से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को ठीक किया जा सकता है।

भारतीय आयुर्वेद में इसका अधिक महत्व है। इसकी जड़ों से लेकर तने, पत्तियां और फूल को औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है।

भृंगराज ( Bhringraj ) के पौधे में बहुत ही उपयोगी औषधीय गुण पाये जाते हैं। जिसका उपयोग शरीर के अंदर या बाहर होने वाली अनेक प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है।

आयुर्वेद चिकित्सक प्रायः बालों को झड़ने से रोकने, बालों के पकने, बालों के बढ़ने, लीवर, किडनी सहित पेट की कई बीमारियों के लिए मरीज को भृंगराज के सेवन की सलाह देते हैं।

इसके अंदर अनेक प्रकार के एंटी-ऑक्सिडेंट्स जैसे- फ्लैवानॉयड और एल्कलॉइड होते हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने का काम करते हैं।

भृंगराज ( Bhringraj ) का एंटी-माइक्रोबियल गुण लीवर को हेपेटाइटिस सी जैसे वायरल संक्रमण से भी बचाता है। हेपेटोप्रोटेक्टिव (लीवर को स्वस्थ रखना) और एक्सपेक्टोरेंट (कफ जैसी श्वांस की बीमारी को दूर करना) जैसे कई औषधीय गुण होते हैं।

भृंगराज शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति को मजबूत करने वाला एक उपयोगी जड़ी बूटी है जो शरीर को विभिन्न संक्रमणों से सुरक्षित रखता है।

भारत में भृंगराज (एक्लिप्टा अल्बा) को अनेक नामों जैसे- भांगड़ा, थिसल्स, माका, फॉल्स डेज़ी, मार्कव, अंगारक, बंगरा, केसुति, बाबरी, अजागारा, बलारी, मॉकहैंड, ट्रेलिंग एक्लीप्टा, एक्लीप्टा, प्रोस्ट्रेटा आदि से पहचाना जाता है।

इसकी खेती भारत के अलावा चीन, थाईलैंड और ब्राजील में की जाती है।

भृंगराज के फायदे – (Benefits of Bhringraj)

आइए, भृंगराज के कुछ खास फायदों के बारे में विस्तार से बात करते हैं।

बालों के लिए भृंगराज तेल के फायदे (Benefits of Bhringraj oil for hair)

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आयुर्वेद में भृंगराज को केसराज के नाम से भी जाना जाता है। इसे झड़ते बालों को रोकने, बालों को काला करने एवं त्वचा संबंधी बीमारी के उपचार के रूप प्रयोग किया जाता है।

भृंगराज ( Bhringraj ) को आयुर्वेद में परंपरागत रूप से बालों के विकास को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है। भृंगराज के तेल में मौजूद मेथनॉल नामक पोषक तत्व बालों के विकास को आसान बनाने में मदद कर सकता है।

इसके तेल से नियमित मालिश करने से स्कैल्प के रक्त संचार में सुधार होता है। तेल में मौजूद मेथनॉल नामक पोषक तत्व बालों की जड़ को मजबूत करने के साथ ही गंजेपन को रोक में मदद करता है

1 चम्मच भृंगराज पाउडर लें। इसमें नारियल का तेल मिला लें और बालों की जड़ों में लगाकर मसाज करें। इसके बाद बालों को एक या दो घंटों के छोड़ने के बाद किसी हर्बल शैंपू से धो लें।

ऐसा सप्ताह में तीन बार करें। बेहतर परिणामों के लिए, कम से कम 4 से 6 महीने तक लगातार उपयोग करना चाहिए। भृंगराज (bhringraj oil) के तेल, पाउडर या पेस्ट गंजेपन, बालों के झड़ने, असमय बालों के पकने आदि समस्याओं में राहत पहुंचाता है।

कफ एवं वात विकार में फायदेमंद (use in cough and vata disorder):

भृंगराज के अर्क में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। इस गुणों के कारण भृंगराज हानिकारक कीटाणुओं को पैदा होने से भी रोक सकता है। इस प्रकार भृंगराज के अर्क का सेवन आपको कफ एवं वात विकार को कम करने का काम करता है।

 अपच, कब्ज एवं पेट संबंधी अन्य परेशानी में फायदेमंद (use in constipation, digestion and stomach problem):

इसके अंदर रहने वाला एंटी-इंफ्लमैटरी तत्व लीवर को स्वस्थ रखकर, पेट की कार्यप्रणाली को सुगम बनाने का काम करता है, जिससे आंत सुचारू रूप से कार्य करता है और अपच, कब्ज और पेट की अन्य परेशानियों जैसे एसिडिटी, पाचन, कब्ज और भूख की कमी के इलाज में भी उपयोगी होता है।

लीवर एवं किडनी संबंधी विकार में मदद (use in liver and kidney disease):

यह लीवर के साथ-साथ किडनी के लिए भी फायदेमंद होता है। इसके जड़ का प्रयोग शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को बाहर निकालने और शारीरिक कार्यप्रणाली को गतिशील रखने के लिए किया जाता है।

 फैटी लीवर और पीलिया आदि में भी फायदेमंद (use in fatty liver and jaundice):

इसके अंदर एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लैमटेरी गुण होता है। जो फैटी लीवर, पीलिया जैसी बीमारी में फायदा पहुंचाता है।

 भृंगराज त्वचा संबंधी विकारों में लाभदायक (use on skin disease):

भृंगराज एक जड़ी बूटी है जिसमें एंटी-इंफ्लामेंटरी होता है। यह त्वचा को संक्रमण से सुरक्षित रखता है।

औषधीय गुण के कारण भृंगराज त्वचा संबंधी विकारों जैसे- त्वचा के कटने, छिलने, घाव होने या चोट में काफी असरदायक होता है। विकार की स्थिति में भृंगराज की पत्तियों का पेस्ट बनाकर लगाएं या इस पेस्ट को किसी तेल में मिलाकर घाव अथवा चोट वाले स्थान पर लगाएं।

शरीर को ऊर्जावान करना (body Energy Boost)

आयुर्वेद में भृंगराज का उपयोग औषधीय गुणों के कारण एनर्जी बूस्टर के रूप में किया जाता है। इसके उपयोग से उम्र के साथ खत्म होती ऊर्जा को फिर से वापस लाया जाता है। साथ ही इसका उपयोग शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है

प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाने में मदद (use for immunity power):

यह शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति को मजबूत बनाने वाली कोशिकाओं (सफेद रक्त कोशिकाओं) के उत्पादन में सहायता करता है।

यह हमारे शरीर को संक्रमण से बचाने वाली सफेद रक्त कोशिकाएं (WBC) को बढ़ाने का काम करता है। इसके अलावा, यह प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार करके शरीर को रोगों से लड़ने के लिए तैयार करता है।

 भृंगराज के सेवन का तरीका (how to take bhringraj):

आयुर्वेद के अनुसार, आप एक दिन में दो बार भृंगराज की खुराक ले सकते हैं। अगर भृंगराज का सेवन लगातार 3 से 4 माह तक किया जाए तो शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति मजबूत होती है।

आप 2 से 3 ग्राम भृंगराज पाउडर को शहद के साथ मिलाकर हल्का खाना खाने के बाद ले सकते हैं। आप बाजार में मिलने वाली भृंगराज के कैप्सूल (bhringraj capsule) का प्रयोग कर समस्याओं से राहत पा सकते हैं, लेकिन सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

 भृंगराज के नुकसान (Side Effects of Bhringraj)

शोध के अनुसार अब तक भृंगराज से होने वाले दुष्प्रभाव का कोई प्रामाणिक तथ्य का पता नहीं लगा है।

अधिक मात्रा में सेवन करने से आपको पेट से संबंधित परेशानी हो सकती है।

इसी तरह गर्भावस्था और स्तनपान की अवस्था में भृंगराज का सेवन नहीं करें।
अगर आप मधुमेह से पीड़ित हैं और आपके शुगर का लेवल बढ़ा हुआ है तो भृंगराजासव के सेवन से बचना चाहिए।

भृंगराजासव के सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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